जीवन

#thought

बचपन में हम खेलते थे,
अब जीवन हमसे खेल रहा है।

क्षण – क्षण अब आँधियों में,
जीवन का रुख़ बदल रहा है।

पलकों पर सजाकर सपने,चले थे डगर पर!

अब राह मुश्किल खड़ी दिखती है,
और सफर हंस रहा है।

एक आवाज़ आती है,
और कहती है मुझसे,
क्युं तेरा तप अब पिघल रहा है?

पग-पग पड़ते पत्थरों से,
लहू तेरा रिस रहा है!

जान कर के होसलों में ये तूने घुन लगाई है,
अब लहू क्युं तेरा ठंडा पड़ रहा है?

हौसला पस्त करके खुद का,
अब क्युं तू बस आँखे मल रहा है|

🌸

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इरादा है…

#ishq

इश्क़ तो नही है तुमसे, पर इश्क़ करने का इरादा है।
सूने पड़े दिल को, प्यार से भरने का इरादा है।

तुमसे प्यार करने का, और प्यार पाने का इरादा है।
मेरी चाय और तुम्हारी चाय के प्यालों ☕☕ को एक करने का इरादा है।

कुछ सुनने का और थोड़ा कुछ सुनाने का इरादा है।

छोटी छोटी बातों से तुम्हे छेड़ने का इरादा है,
और फिर बच्चों की तरह, तुम्हारे मचलने को देखने का इरादा है।

तुम्हारे हँसते हुए चेहरे को सहलाने का इरादा है,
तुम्हारे रोती हुई आँखों को चूम लेने का इरादा है।

इश्क़ तो नही है तुमसे, पर इश्क़ करने का इरादा है।

सूने पड़े दिल को, फ़िर प्यार से भरने का इरादा है।

कुछ दिल की धड़कने सुनने का
और कुछ सुनाने का इरादा है।

तुम्हारी जुल्फों से खेलने का,
और उसकी खुशबू मे गुम जाने का इरादा है।

तुम्हारे लिए दुनिया से लड़ जानेका,
और सबसे छीनकर अपना बनाने का इरादा है।

तुम्हारे हर दर्द को खुद का दर्द बनाने का इरादा है,
मेरी खुशियों को तुम्हारी खुशियाँ बनाने का इरादा है।

इश्क़ तो नही है तुमसे, पर इश्क़ करने का इरादा है।

सूने पड़े दिल को, फ़िर प्यार से भरने का इरादा है।

#सागर

नीले सागर की ख़ामोशी तो देखो!

क्षण मे बहा ले जाए।

ख़ामोश सी हंसी, भयंकर रुदन;

करुणामयी साँसें उसकी हिलोरें ले पल-छिन।

अंतर्द्वंद समाप्त हो, उसके पूर्व सब भंगुर।

कोन्धि है धरा उसकी गरज सुन;

अब नील शांत सा वो उछल गया,

क्रीडा करते!

नम्र आकाश तले, वो था प्रेम मूरत!

एक शोर हुआ उसका और हुआ परिवर्तन।

“हाँ इश्क़ है मुझे “

#Kavita#ishq

चाय की चुस्की के साथ तेरी हर बात लिखूँगा
हर एक पन्ने मे मेरे जज़्बात लिखूँगा

तु गर जो कह दे एक बार
कि हाँ, ‘इश्क’ है मुझे
मैं जिंदगी भर, इंतज़ार करूँगा।।

“हाँ इश्क़ है मुझे,

तुमसे इश्क़ है मुझे”

वो यादें ही तो हैं,जो अब तक साथ हैं
जिनके सहारे स्याही मे जान है;

हाँ मैं मानता हूँ गलती है मेरी
जाने दिया बस यूहीं, बिना पुकारे2

पर वादा है मेरा अब जब आओगी,
मेरा ‘इश्क’ भुला देगा गम सारे।

जन्नत थी जिंदगी मेरी,जब साथ थी तु,
अब बस साँसे ही चलती हैं!

कह दो ना फिर एक बार,

“हाँ इश्क़ है मुझे,
तुमसे इश्क़ है मुझे”

#kavita#motivation

धुंधलका है छाया कुछ सपनों का

मन भर आया है फिर अपनों का

सांझ होते ही आज फिर वो याद बोराइ सी

स्वप्निल हो वो फिर शर्माइ सी।

अब उठ गए कदम फिर सोचो मत

तपिश की है ये डगर अब डरो मत

कह दो अब तुम जो है दबा हुआ कहीं

खाली करदो मन अब पतझड़ सा

आने दो फिर नए फूल अब सावन के

कब तक यूहीं!!!

हाँ हुई है साँझ अब उठ तू

फिर से राह अब पकड़ तू

जीवंत हो, समझ तू

कुछ नया अब कर तू..!